आपकी बीमा पॉलिसी मैच्योर हो गई हो तो जल्दी से ले लें रकम, नहीं तो चली जाएगी …

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आपकी बीमा पॉलिसी मैच्योर हो गई हो तो जल्दी से ले लें रकम, नहीं तो चली जाएगी ...


हाइलाइट्स:

  • अगर आपने कोई बीमा पॉलिसी ली है, और वह मैच्योर हो गई है, तो जल्दी से उसकी रकम ले लें
  • यदि आपने पॉलिसी को मैच्योर होने के 10 साल तक उसे क्लेम नहीं किया तो फिर वह राशि आपको नहीं मिलेगी
  • आपकी बीमा कंपनी उस पैसे को सरकार के खाते में जमा करा देगी
  • इसका उपयोग किसी और काम में होगा

नई दिल्ली
अगर आपने कोई बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) ली है, और वह मैच्योर (Mature) हो गई है, तो जल्दी से उसकी रकम ले लें। यदि आपने पॉलिसी को मैच्योर होने के 10 साल तक उसे क्लेम नहीं किया तो फिर वह राशि आपको नहीं मिलेगी। आपकी बीमा कंपनी उस पैसे को सरकार के खाते में जमा करा देगी। इसका उपयोग किसी और काम में होगा।

आईआरडीएआई का निर्देश
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इस तरह का निर्देश दिया है। उसके निर्देश के अनुसार अगर किसी पॉलिसी धारक ने बीमा पॉलिसी मैच्योर होने के बाद 10 साल तक उसका क्लेम नहीं किया तो फिर उसको पॉलिसी की मैच्योरिटी राशि नहीं मिलेगी। पॉलिसी के मैच्योर होने के 10 साल के बाद संबंधित इंश्योरेंस कंपनी उस पॉलिसी के सारे पैसे सरकारी खजाने में जमा करा देगी। IRDAI ने अपने नए सर्कुलर में कहा है कि पॉलिसी होल्डर (Policyholder) ड्यू डेट खत्म होने के 10 साल के अंदर क्लेम कर सकते हैं। यदि 10 साल से ज्यादा समय बीत गया तो फिर पॉलिसी होल्डर का उस पर कोई हक नहीं बनता है।

सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड में जमा होगी राशि
बीमा नियामक ने निर्देश दिया है कि सभी इंश्योरेंस कंपनियों को पॉलिसी की मैच्योरिटी के 10 साल बीत जाने के बाद अनक्लेम्ड अकाउंट (Unclaimed Account) को सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड में जमा कराना होगा। यह नियम भारतीय जीवन बीमा निगम समय सभी बीमा कंपनियों के लिए लागू होंगे। नियामक ने एक बार फिर से स्पष्ट किया है कि सभी बीमा कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी देनी होगी कि बिना क्लेम वाली कितनी रकम उसके पास बची है। इसे हर 6 महीने में अपडेट करना होगा।

इतनी है अनक्लेम्ड राशि
अनुमानित आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर 2018 तक बीमा कंपनियों के पास 17877.28 करोड़ रुपये बीमा कंपनियों के पास अनक्लेम्ड राशि के रूप में पड़े थे। इनमें जीवन बीमा कंपनियों के पास 16887.66 करोड़ रुपये और साधारण बीमा कंपनियों के पास 989.62 करोड़ रुपये थे। आईआरडीएआई ने सभी बीमा कंपनियों को कहा है कि वह वेबसाइट पर क्लेम राशि की सर्च की सुविधा भी उपलब्ध कराएं। इसकी मदद से पॉलिसी धारक इस बात का पता लगा सकते हैं कि उनके नाम पर इन कंपनियों के पास कोई बिना दावे की रकम को नहीं है। इसके बाद वह अपनी पॉलिसी की राशि का क्लेम कर सकते हैं।



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