कांग्रेस पर बिफरे कपिल सिब्बल, कहा- डेढ़ साल से बिना अध्यक्ष पद के कैसे कोई राष्ट्रीय पार्टी काम कर सकती है?

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कांग्रेस पर बिफरे कपिल सिब्बल, कहा- डेढ़ साल से बिना अध्यक्ष पद के कैसे कोई राष्ट्रीय पार्टी काम कर सकती है?


नई दिल्ली
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस काफी दिनों से अंतर्कलह से जूझ रही है। पहले तो दबी-दबी आवाज से विरोध हो रहा था उसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक पत्र सामने आया था। ये पत्र कांग्रेस के अध्यक्ष पद को लेकर था। इस पत्र के बाद सीडब्ल्यूसी (CWC Meeting) की बैठक हुई और राहुल गांधी का गुस्सा उन नेताओं पर फूट पड़ा। इस पत्र की अगुवाई कर रहे थे गुलाम नबी आजाद। आजाद पार्टी के शीर्ष नेता हैं लेकिन उनको भी साइडलाइन कर दिया गया। अब कपिल सिब्बल ने कांग्रेस को लेकर कई बड़ी बातें कहीं हैं।

कार्यकर्ता अपनी समस्या लेकर कहां जाएं- सिब्बल
कपिल सिब्बल ने एक इंटरव्यू (Kapil Sibbal Interview) के दौरान कहा, ‘दिक्कत ये है कि राहुल गांधी डेढ़ साल पहले यह बात साफ कर चुके हैं कि वे अब कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनना चाहते। उन्होंने यह भी कहा था कि मैं नहीं चाहता कि गांधी परिवार का कोई भी व्यक्ति उस पद पर काबिज हो। इस बात के डेढ़ साल बीत जाने के बाद मैं ये पूछता हूं कि कोई राष्ट्रीय पार्टी इतने लंबे समय तक अपने अध्यक्ष के बिना कैसे काम कर सकती है।’ सिब्बल ने कहा कि मैंने पार्टी के भीतर आवाज उठाई थी। हमने अगस्त में चिट्ठी भी लिखी। लेकिन किसी ने हमसे बात नहीं की। मैं जानना चाहता हूं कि डेढ़ साल बाद भी हमारा अध्यक्ष नहीं है। कार्यकर्ता अपनी समस्या लेकर किसके पास जाएं।

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कांग्रेस पर हमला
कपिल सिब्बल (Kapil Sibal On Congress Letter) ने चिट्ठी कांड भी खुलकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मैंने यह कब कहा, मैं पार्टी फोरम में बात कैसे रखूं जब मैं कभी सीडब्ल्यूसी का हिस्सा नहीं रहा। पार्टी का कोई अध्यक्ष भी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने अगस्त 2020 में जो चिट्ठी लिखी थी वो हमारी तीसरी चिट्ठी थी। गुलाम नबी जी इससे पहले दो चिट्ठियां लिख चुके थे। लेकिन फिर भी किसी ने हमसे बात नहीं की। इसलिए जब मुझे मौका मिला तो मैंने बात की।

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चुनावों में हार जीत लगी रहती है- सिब्बल
कपिल सिब्बल ने आगे कहा कि हम 2014 में हारे कुछ नहीं हुआ, फिर हम 2019 में हारे कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। चुनाव होते रहते हैं लेकिन मैं चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी कम से कम अपने भविष्य के रास्ते पर तो ठीक से चले। शीर्ष नेतृत्व में बदलाव से जुड़े सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा कि जब हमारा नेता ही ये कह रहा है कि वो अध्यक्ष नहीं बनना चाहता तो मैं शीर्ष नेतृत्व में बदलाव की बात क्यों करूंगा। राहुल गांधी खुद कह चुके हैं कि वो अध्यक्ष नहीं बनना चाहते।

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यहां से शुरू हुआ था पूरा मामला
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही पार्टी के अंदर अंर्तकलह की शुरुआत हो गई थी। उसके बाद ये मामला तब ज्यादा गरमा गया जब कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने खुलकर कहा कि कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी आलाकमान से नाराजगी जाहिर की है। तब कांग्रेस ने इस बात को सिरे से नकार दिया था। उसके बाद गुलाम नबी आजाद का एक पत्र सार्वजनिक हो गया। इसी के बाद से ही कांग्रेस में हलचल पैदा हो गई। कांग्रेस के इन नेताओं की शिकायत थी कि पार्टी को एक्टिव अध्यक्ष मिलना चाहिए ताकि नए ताकत के साथ कांग्रेस उभरे। लेकिन गुलाम नबी आजाद को पार्टी से साइड लाइन कर दिया गया। संजय झा को भी कांग्रेस ने निष्काषित कर दिया गया था।



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