क्या शेयर बाजार में उछाल एक ‘बुलबले’ की तरह है जो फूटने वाला है?

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क्या शेयर बाजार में उछाल एक 'बुलबले' की तरह है जो फूटने वाला है?


शेयर बाजार इस समय अपने चरम पर ट्रेड कर रहा है। अभी सेंसेक्स 44 हजार के स्तर को पार कर गया है। दूसरी तरफ इकॉनमी को लेकर तमाम रिपोर्ट नेगेटिव ही है। ऐसे में क्या यह एक बबल की तरह तो नहीं है, इस सवाल पर बखूबी चर्चा हो रही है। बाजार के कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि अब बुलिश ट्रेंड खत्म होने वाला है और इसमें हेल्दी करेक्शन आएगा।

बड़े पैमाने पर हुआ है निवेश

नवंबर के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बड़े पैमाने पर खरीदारी की है, जिसके कारण शेयर बाजार में बुल है। लॉकडाउन के दौरान FPI ने इस तरह की खरीदारी नहीं की थी। नवंबर के महीने में शुरुआती 20 दिनों में 44 हजार करोड़ से ज्यादा का नेट इन्फ्लो आया है। इस दौरान सेंसेक्स में 4200 से ज्यादा अंकों यानी करीब 11 फीसदी की तेजी आई है।

FPI की खबर से बाजार में बहार

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी कंपनी को लेकर अच्छी खबर आती है तो उसका उतना सकारात्मक असर नहीं दिखाई देता है। वहीं FPI की खबर से शेयर बहुत तेजी से बढ़ता है। दिसंबर अंत तक विदेशी निवेशकों की तरफ से निवेश में गिरावट दर्ज की जाएगी जिसके कारण मार्केट में हेल्दी करेक्शन होगा।

इमरजेंसी लेंडिंग प्रोग्राम पर रोक

ट्रंप टीम ने अमेरिकी ट्रेजरी की तरफ से इमरजेंसी लेंडिंग प्रोग्राम पर रोक का फैसला लिया है। इसका असर पूरे विश्व की इकॉनमी पर होगा। जो बाइडेन और ट्रंप के बीच पावर टसल का असर पूरे विश्व की इकॉनमी पर हो रहा है। ट्रंप अमेरिका में गद्दी छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में इन घटनाओं का शेयर बाजार पर सीधा असर होगा।

कोरोना के मामलों में तेजी

भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नए सिरे से लॉकडाउन लगाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों में तेजी के कारण वहां की सरकार फिर से ट्रेन और प्लेन सेवा पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। एक्सपर्ट्स पहले बता चुके हैं कि ठंड के महीने में एक नया वेब आएगा और यह काफी खतरनाक होगा। ऐसे में कोरोना के मामलों में तेजी का असर साफ-साफ दिखाई देगा।

गवर्नर दास ने भी दी थी हिदायत

पिछले दिनों रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी कहा था कि शेयर बाजार की चाल इकॉनमी की चाल से बिल्कुल अलग है। इस बहाने उन्होंने निवेशकों और खासकर नए निवेशकों को आगाह किया था कि वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लें और शेयर बाजार में एंट्री से पहले अच्छे से विचार कर लें।



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