गेम खिलाने के बहाने किया यौन शोषण, ऑनलाइन पॉर्न भी बेचा, अब बढ़ी न्यायिक हिरासत

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गेम खिलाने के बहाने किया यौन शोषण, ऑनलाइन पॉर्न भी बेचा, अब बढ़ी न्यायिक हिरासत


भोपाल/बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा में जेई (Jounior Engineer) की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई है. सिंचाई विभाग के इंजीनियर पर 50 बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा है. पॉक्सो (POCSO) कोर्ट बांदा के न्यायाधीश पंचम रिजवान अहमद के सामने आरोपी जूनियर इंजीनियर रामभवन की ऑनलाइन पेशी हुई. जज ने आरोपी को 30 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में बांदा जेल भेजा है. साथ ही 24 नवम्बर को पुलिस कस्टडी रिमांड पर सुनवाई की तारीख भी तय की है.

सीबीआई के वकील अशोक सिंह चंदेल ने बताया कि ”पॉक्सो कोर्ट बांदा में बच्चो के यौन शोषण के आरोपी इंजीनियर के रिमांड को लेकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये 2 बजे से सुनवाई की गई. जिसमें माननीय न्यायालय ने आरोपी की न्यायिक हिरासत को बढ़ा करके 30 नवम्बर और पुलिस रिमांड कस्टडी सुनवाई को आगामी 24 नवम्बर तय की गई है.”

10 साल से कर रहा था ‘गंदा काम’ 
अधिकारियों ने बताया कि सिंचाई विभाग में तैनात आरोपी करीब दस साल से ये गंदा काम कर रहा था. अपने विभाग के काम से अलग होकर कथित तौर पर ऑनलाइन वीडियो और फोटोग्राफ की बिक्री भी करता था. उसने बच्चों का शारीरिक शोषण तो किया ही, साथ ही अपने इस गंदे काम में मोबाइल फोन, लैपटॉप और बाकी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भी इस्तेमाल किया. इसके जरिए वो बाल यौन शोषण वाली तस्वीरें और वीडियो फिल्मों को इंटरनेट के जरिए पॉर्न साइट्स को बेचता था. 

आरोप है कि राम भवन ने कई और लोगों के साथ मिलकर आपत्तिजनक सामग्री की बिक्री, प्रसारण और शेयर करने के लिए डार्कवेब का भी इस्तेमाल किया. पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया है कि वह इन घिनौने कृत्यों को छिपाने के लिए पीड़ित बच्चों को पैसा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण समेत कई और चीजें भी देता था. 

सीबीआई की गिरफ्तारी के बाद किया गया था सस्पेंड
सिंचाई विभाग चित्रकूट में तैनात जूनियर इंजीनियर रामभवन की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी होने के बाद विभाग ने उसे सस्पेंड कर दिया था. CBI की टीम ने उसे बांदा से गिरफ्तार किया था. बताया जा रहा है कि पीड़ित बच्चे ज्यादातर बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर के रहने वाले थे. 

पॉक्सो एक्ट और सजा
POCSO एक्‍ट का अर्थ होता है, प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012. इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों पर कार्रवाई की जाती है. बच्चों के साथ की जाने वाली लैंगिक उत्पीड़न के तहत अलग-अलग सजा का प्रावधान है. 

कानून में 12 साल की बच्चियों से रेप पर फांसी की सजा, 16 साल से छोटी लड़की से गैंगरेप पर उम्रकैद की सजा, 16 साल से छोटी लड़की से रेप पर कम से कम 20 साल तक की सजा दी जा सकेगी. इस तरह के मामलों में कोर्ट को 6 महीने के अंदर अपना फैसला सुनाना होगा. इसके अलावा दोषी को अग्रिम जमानत भी नहीं दी जाएगी.

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