मास्क पर सख्ती: 2,000 रुपये जुर्माना होने से बाजारों में जाने से कतरा रहे हैं ग्राहक

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मास्क पर सख्ती: 2,000 रुपये जुर्माना होने से बाजारों में जाने से कतरा रहे हैं ग्राहक


हाइलाइट्स:

  • वैश्विक महामारी कोरोना के दिल्ली में बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली सरकार सख्त हो गई है
  • अब मास्क नहीं पहनने वालों से 500 रुपये के बजाय 2,000 रुपये वसूले जा रहे हैं
  • इससे दिल्ली के थोक बाजारों में खलबली मच गई है
  • अब इन बाजारों में ग्राहक जाने से डर रहे हैं

सूरज सिंह, नई दिल्ली
वैश्विक महामारी कोरोना (Corona) के दिल्ली में बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली सरकार सख्त हो गई है। अब मास्क नहीं पहनने वालों से 500 रुपये के बजाय 2,000 रुपये वसूले जा रहे हैं। इससे दिल्ली के थोक बाजारों (Wholesale Markets of Delhi) में खलबली मच गई है। अब इन बाजारों में ग्राहक जाने से डर रहे हैं। इनका कहना है कि गलती से भी मास्क (Mask) नाक से उतर जाए तो पुलिस जबरन 2,000 रुपये का जुर्माना ले लेगी। ऐसे में वहां खरीदारी से बचत तो होगी नहीं, उल्टे लेने के देने पड़ जाएंगे। इससे बढ़िया अपने आसपास के दुकानों से खरीदारी करें।

थोक बाजारों का रहा है जलवा
दिल्ली में सदर बाजार, खारी बावली, मटिया महल, बल्ली मरान, चांदनी चौंक, पहाड़ गंज, करोल बाग आदि कुछ थोक बाजारों में दिल्ली से ही नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर से लोग खरीदारी करने आते हैं। इन दुकानों में न सिर्फ क्वालिटी का सामान (Quality Goods) मिलता है बल्कि सस्ता भी मिलता है। लेकिन मास्क पर सख्ती से यहां ग्राहक आने से बिदक रहे हैं। गाजियाबाद से मसालों और सूखे मेवों की खरीदारी करने खारी बावली पहुंचे संजय कुमार का कहना है कि अब तो यहां आने में भी डर लगता है। दिल्ली पुलिस के जवान जगह जगह खड़े हैं। जिनके नाक पर से गलती से मास्क उतर रहा है, उनसे भी पुलिस वाले जबरन 2,000 रुपये का जुर्माना वसूल रहे हैं।

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महंगे जुर्माने से बढ़ेगा भ्रष्टाचार
फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स असोसिएशन के प्रेसिडेंट राकेश यादव ने कहा कि सरकार की नेगेटिव अप्रोच नहीं होनी चाहिए। इतने महंगे जुर्माने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। हर किसी की जेब में 2,000 रुपए नहीं होते हैं, ऐसे में किसी के पास 500-1,000 रुपए भी होंगे, तो चालान काटने वाले उससे वह पैसा लेकर अपनी जेब में रख लेंगे। कई बार मास्क हटाना मजबूरी होती है। सरकार का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। इस तरह के निर्णय से मार्केट में पैनिक स्थिति क्रिएट होगी। वैसे भी चालान काटने वालों को रोज का टारेगट मिला होता है। उसके लिए भी इसे पूरा करना मुश्किल होगा। पिछले दिनों तो दुकानों और दफ्तर में अकेले बैठे बिना मास्क के व्यापारियों के भी चालान कटे, जिससे किसी को संक्रमण होने का खतरा नहीं था। इसका पुरजोर विरोध होने पर थोड़ी नरमी बरती गई।

इस तरह की सख्ती अन्यायपूर्ण
तेलीवाड़ा मार्केट के व्यापारी सुमित माटा का कहना है कि 2,000 रुपए का चालान काफी महंगा है। इसे हर कोई वहन नहीं कर सकता। किसी दुकानदार, ग्राहक, मजदूर, रिक्शे-ठेले वाले या पल्लेदार से गलती से भी मास्क नीचे खिसक गया, तो वह 2,000 रुपए कहां से लाएगा? ये लोग 2-3 दिनों में 2,000 रुपए की कमाई नहीं कर पाते हैं। कोरोना से बचाव के लिए मास्क जरूरी है, लेकिन इस तरह की सख्ती अन्यायपूर्ण है। आज की तारीख में कोई चालान के रूप में 100 रुपए भी नहीं देना चाहता। ऐसे में यह राशि कम होनी चाहिए। सरकार, सामाजिक, धार्मिक संस्थाएं बाजारों में निशुल्क मास्क बंटवाएं। साथ ही लोगों को जागरुक करें कि किस तरह मास्क पहनना चाहिए।

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व्यवहारिक समस्याएं समझे सरकार
पालम के बालकृष्ण अमरसरिया कहते हैं कि मास्क नहीं पहनने पर जुर्माने की रकम बहुत ज्यादा है। बाजारों में अधिकतर लोगों की जेब में 2 हजार रुपए नहीं होते हैं। ई-बैकिंग के दौर में हर कोई मोबाइल या एटीएम से पेमेंट करता है। ऐसे में किसी वजह से मास्क नहीं पहना या नाक से नीचे खिसक गया, तो चालान टीम को कैसे जुर्माना चुकाएगा? इससे तो जो उसकी जेब में पैसा होगा, वही चालान काटने वाले ले लेंगे, जो सरकार के खाते में भी नहीं जाएगा। सरकार को व्यवहारिक समस्याएं भी समझनी होंगी। कई बार मास्क की पट्टी टूट जाती है, वह कान से सरक कर गिर जाता है। खांसने, छींकने या थूकते वक्त मास्क हटाना पड़ता है, तब वह क्या करेगा?

चालान राशि बढ़ाकर खजाना भर रही सरकार
चावड़ी बाजार में रहने वाले मोहम्मद नफीस कहते हैं कि दो दिन पहले हौजकाजी थाने के बाहर सिविल डिफेंस वालों ने एक रिक्शा चालक की फोटो खींच ली। वह मास्क पहन ही रहा था। उससे चालान के नाम पर 500 रुपए की डिमांड की जाने लगी। वो तो बेचारा दिनभर में 500 रुपए नहीं कमा पाता। अब 2,000 रुपए का चालान हो जाएगा, तो गरीब क्या करेंगे? उनके मुताबिक, लगता है कि सरकार चालान राशि बढ़ाकर अपना खजाना भरना चाहती है। कोरोना लॉकडाउन के बाद से सरकार का राजस्व घटा है। अब यदि चालान काट ही रहे हो, तो उसे कम से कम 5-10 रुपए का मास्क तो दे दो, ताकि वह आगे उसे कोई परेशान नहीं करे।

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