‘मौत’ के 4 महीने बाद बेटे ने किया फोन, “मुझे जिंदा देखना चाहते हो तो 20 लाख दे दो”, आगे की कहानी दिल थाम कर पढ़िए…

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'मौत' के 4 महीने बाद बेटे ने किया फोन, "मुझे जिंदा देखना चाहते हो तो 20 लाख दे दो", आगे की कहानी दिल थाम कर पढ़िए...


बिजनौर: चार महीने से बेटे की मौत का गम मना रहा एक बड़ा व्यापारी तब सकते में आ गया, जब एक दिन अचानक आए फोन पर उसके उसी बेटे की आवाज आई जिसका वो अंतिम संस्कार कर चुका था. व्यापारी को तब और झटका लगा जब बेटे ने बताया कि वो अपहरणकर्ताओं के चंगुल में है, अगर वो, उसे जिंदा देखना चाहते हैं तो एक मोटी रकम दे दें. बेटे की जान खतरे में है, ये जान कर व्यापारी चिंता में पड़ गया. हालांकि उसे खुशी भी थी कि जिस बेटे को वो मरा समझ रहा था, वो जिंदा है लेकिन अब उसके जेहन में ये सवाल भी कौंध रहा था कि फिर चार महीने पहले उसने जिसका अंतिम संस्कार कर दिया वो कौन था?  

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वो कौन था?
ये हैरतअंगेज मामला बिजनौर के धामपुर में होंडा की गाड़ियों का शो रूम चलाने वाले व्यापारी अशोक कुमार अग्रवाल का है. 6 जुलाई को उनका 42 साल का बेटा पल्लव ऐरन अचानक लापता हो गया, जिसके लापता होने की रिपोर्ट उन्होंने 3 जुलाई 2020 को थाना धामपुर में दर्ज कराई थी. इसके अलावा अपने बेटे को ढूंढने के लिए जगह-जगह उसके पोस्टर भी लगवाए. इस दौरान अशोक के पास दिल्ली पुलिस का फोन आया. पुलिस ने निजामुद्दीन स्टेशन में मिले एक अज्ञात शव की पहचान करने के लिए उन्हें बुलाया.

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बेटे ने ही पिता से मांगी रकम
अशोक ने शव की पहचान अपने बेटे पल्लव के रूप में की और 21 जुलाई को उसका अंतिम संस्कार कर दिया. सब लोगों ने ये मान लिया कि पल्लव अब जिंदा नहीं है, लेकिन करीब चार महीने बाद पिता के पास पल्लव का फोन आया. उसने बताया कि वह किडनैपर्स के चंगुल में है, अगर वो,  उसे जिंदा देखना चाहते हैं तो 20 लाख रुपए का इंतजाम कर लें. अपने बेटे की जिंदा होने की खबर सुनकर अशोक हैरान रह गया, कि आखिर जिस बेटे का अंतिम संस्कार हो चुका है वह जिंदा कैसे हो सकता है, लेकिन कहीं न कहीं वह इस बात को सुनकर बेहद खुश भी था, कि उसका बेटा अभी जिंदा और सही सलामत भी है.

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अशोक ने पूरी घटना की सूचना बिजनौर पुलिस को दी. क्राइम, थ्रिलर और सस्पेंस से भरे इस मामले को सुनकर एसपी धर्मवीर सिंह भी हैरान रह गए. उन्होंने सर्विसलांस टीम, स्वाट टीम और स्थानीय पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए. पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद पल्लव को हरिद्वार से बरामद किया. इस साजिश को रचने वाले आरोपियों संजीव तोमर, दीपक और शुभम को भी गिरफ्तार कर लिया है.

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पहले भी ब्लैकमेल कर वसूले थे लाखों रुपए
वहीं इस मामले पर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि पल्लव डिप्रेशन में है. इसी बात का फायदा उठाकर संजीव तोमर, शुभम और दीपक ने बाप-बेटे के बीच गलतफहमी पैदा की और उसे हरिद्वार लेकर चले गये. उन्होंने बताया कि अभी तक आरोपियों द्वारा अशोक से 3 लाख 60 हजार रुपये ऐंठे जा चुके हैं. धर्मवीर सिंह ने बताया कि पल्लव को इलाज की जरूरत है. तीनों आरो​पी पल्लव को लगभग चार महीनों तक हरिद्वार और इधर-उधर घुमाते रहे. फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज दिया है.

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