Loan Moratorium Case: बैंक क्रेडिट करेंगे ब्याज पर ब्याज की छूट का लाभ

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Loan Moratorium Case: बैंक क्रेडिट करेंगे ब्याज पर ब्याज की छूट का लाभ


हाइलाइट्स:

  • सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले से जुड़ी याचिका का निपटारा कर दिया
  • कोर्ट ने कहा कि पक्षकारों का जो भी सुझाव है उसे केंद्र सरकार के सामने पेश करें
  • बैंकों की जिम्मेदारी है कि मोरेटोरियम अवधि के ब्याज पर ब्याज में छूट को क्रेडिट करे
  • उपभोक्ता को इसके लिए बैंकों को याद दिलाने की जरूरत नहीं है

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम मामले (Loan Moratorium Case) में ब्याज पर ब्याज से मिली छूट पर संतोष जाहिर करते हुए गुरुवार को याचिका का निपटारा कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पक्षकारों का जो भी सुझाव है उसे आरबीआई और केंद्र सरकार के सामने पेश करें। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे मोरेटोरियम अवधि के ब्याज पर ब्याज में छूट को क्रेडिट करें। उपभोक्ता को इसके लिए बैंकों को याद दिलाने की जरूरत नहीं है। दो करोड़ रुपये तक के लोन लेने वाले सभी लेनदारों को इसका लाभ मिलेगा।

लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने 9 अक्टूबर को दाखिल एफिडेविट का हवाला दिया और सिलसिलेवार तरीके से पूरा ब्यौरा पेश किया। अदालत को बताया गया कि यह महामारी राष्ट्रीय आपदा बन चुकी है और सरकार के साथ-साथ आरबीआई ने तमाम कारगर कदम उठाए हैं। सॉलिसिटर जनरल ने कामत कमिटी की रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा गया कि बड़े लोन को रीस्ट्रक्चर करने की बात है। आरबीआई के सर्कुलर से ज्यादा से ज्यादा लोग कवर हुए हैं। बैंक को पर्याप्त बदलाव का अधिकार दिया गया है। व्यक्तिगत बॉयर्स के केस देखने, लोन रीस्ट्रक्चर करने और पेमेंट प्लान आदि तय करने के बारे में बैंकों को अधिकार दिए गए हैं। लोन लेने वालों को बैंक द्वारा एसएमएस और मेल किए जा रहे हैं बैंक लोन अकाउंट को रीस्ट्रक्चर कर रहा है।

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किसे मिलेगा फायदा
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि बैंकों को कहा गया है कि वे पेमेंट प्लान को रीशिड्यूल करें। बैंकों ने लोन अकाउंट होल्डरों को अप्रोच करना शुरू कर दिया है ताकि लोन को रीस्ट्रक्चर किया जा सके। साथ ही कहा कि कोरोना काल से पहले के डिफॉल्टरों को नई स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार ने जो फैसला लिया है उसके तहत जिन लोगों ने मोरेटोरियम अवधि में ईएमआई का भुगतान किया है, उन्हें भी लाभ दिया जाएगा। उन्हें दंडित नहीं किया जाएगा बल्कि सभी को मोरेटोरियम अवधि में दी गई छूट का लाभ मिलेगा।

वित्त मंत्रालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये बैंक की जिम्मेदारी है कि वह दो करोड़ रुपये तक के लोन के लिए ब्याज पर ब्याज में छूट को क्रेडिट करे। इसके लिए उपभोक्ता को बैंक को याद दिलाने की जरूरत नहीं है। अदालत ने कहा कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले को इस बेनिफिट का लाभ नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने सामान खरीदा है लोन नहीं लिया था।

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वित्त मंत्रालय की स्कीम
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया था कि कर्जदारों के अकाउंट में मोरेटोरियम अवधि के ब्याज पर ब्याज की रकम जमा करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया था कि आरबीआई की मोरेटोरियम स्कीम के दौरान दो करोड़ रुपये तक के लोन लेने वाले कर्जदारों के लिए कंपाउंड इंट्रेस्ट और सामान्य ब्याज के बीच के अंतर की रकम बैंक जमा कर देंगे और इस रकम का दावा बैंक केंद्र सरकार से करेगा।

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वित्त मंत्रालय ने स्कीम जारी की है जिसके मुताबिक लोने देने वाले बैंक कोविड के कारण छह महीने के मोरेटोरियम की अवधि के दौरान सामान्य ब्याज और कंपाउंड इंट्रेस्ट के बीच की अंतर की राशि कर्जदारों के खाते में जमा करेगा। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार ने निर्देश जारी किया है कि स्कीम के तहत कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थान सरकार के निर्देश का पालन करेंगे और जो राशि कर्जदार की बनती है उसे उसके खाते में डाली जाएगी।



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